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मोतिहारी में 22 करोड़ की सड़क-नाला परियोजना पर सवाल, रात में ढलाई और सुबह पड़ रही दरारें

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मोतिहारी के अरेराज में पथ निर्माण विभाग की 22 करोड़ रुपये की सड़क और नाला परियोजना की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने घटिया सामग्री और निर्माण में अनियमितता का आरोप लगाया है।

मोतिहारी/आलम की खबर:बिहार में सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी स्थित अरेराज में पथ निर्माण विभाग की ओर से कराए जा रहे सड़क चौड़ीकरण और नाला निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लगभग 22 करोड़ रुपये की लागत से चल रही इस परियोजना में घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल और गुणवत्ता में भारी लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि रात में जिस नाले की ढलाई की जा रही है, उसमें सुबह होते-होते दरारें दिखाई देने लग रही हैं।

यह मामला अरेराज के आईटीआई कॉलेज से जनेरवा तक चल रहे सड़क और नाला निर्माण कार्य से जुड़ा है। इस परियोजना का उद्देश्य सोमेश्वरनाथ महादेव मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को जाम की समस्या से राहत देना बताया जा रहा है। लेकिन निर्माण कार्य की मौजूदा स्थिति देखकर लोग हैरान हैं। स्थानीय दुकानदारों और आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि नाले की सतह पर पड़ रही दरारें साफ संकेत दे रही हैं कि निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा।

स्थानीय लोगों के मुताबिक रात में ढलाई होने के बाद सुबह तक नाले की सतह जगह-जगह फट जाती है। कई स्थानों पर इतनी बड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं कि लोग इसकी तुलना सूखे के दौरान खेतों में पड़ने वाली दरारों से कर रहे हैं। सुबह होते ही मजदूर उन दरारों को भरने और मरम्मत करने में जुट जाते हैं। लोगों का आरोप है कि अगर निर्माण कार्य सही तरीके से किया जा रहा होता तो इतनी जल्दी दरारें नहीं पड़तीं।

इलाके के दुकानदारों का कहना है कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका आरोप है कि सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री की गुणवत्ता बेहद खराब है, जिसके कारण नाला बनने के कुछ घंटों बाद ही टूटने लगता है। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि इंजीनियरों और ठेकेदारों की मिलीभगत से सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है।

अरेराज शहर में चल रही इस परियोजना को लेकर अब आम लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि बिहार में आए दिन पुल और सड़क टूटने की घटनाएं सामने आती रहती हैं और उसके पीछे सबसे बड़ा कारण निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार और लापरवाही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इस परियोजना की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।

इस परियोजना के तहत सड़क चौड़ीकरण के साथ दोनों तरफ नाला निर्माण का काम किया जा रहा है। सड़क बनने से शहर में ट्रैफिक दबाव कम होने और श्रद्धालुओं को सुविधा मिलने की उम्मीद थी। लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि निर्माण कुछ ही घंटों में टूटने लगे तो ऐसे विकास कार्यों का क्या फायदा।

मामले को लेकर जब पथ निर्माण विभाग के जूनियर इंजीनियर से सवाल किया गया तो उन्होंने भी तस्वीरों में दिख रही दरारों को गंभीर मामला माना। उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी कार्यपालक अभियंता को दी जा रही है और मामले की जांच कराई जाएगी। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि निर्माण में गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित संवेदक यानी ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ जांच और कार्रवाई की बात करने से काम नहीं चलेगा। लोगों की मांग है कि निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। उनका कहना है कि सरकारी पैसे से हो रहे विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना जरूरी है।

बिहार में सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता को लेकर पहले भी कई सवाल उठते रहे हैं। कई जिलों में निर्माण के कुछ ही दिनों बाद सड़क टूटने और पुल क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे में मोतिहारी का यह मामला भी अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नाला या सड़क निर्माण में मजबूत बेस, सही मिश्रण और निर्धारित मानकों का पालन बेहद जरूरी होता है। यदि निर्माण के कुछ घंटों के भीतर दरारें आने लगें तो यह गंभीर तकनीकी खामी की ओर संकेत करता है। ऐसे मामलों में तत्काल जांच और सुधारात्मक कार्रवाई आवश्यक होती है।

फिलहाल अरेराज में चल रहे इस निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन और पथ निर्माण विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे या सरकारी धन की बर्बादी से बचा जा सके।

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